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मैं यूँ भी एहतियातन उस गली से कम गुज़रता हूँ;
कोई मासूम क्यों मेरे लिए बदनाम हो जाए।

 

तुम्हारी आँखों में बसा है आशियाना मेरा,
अगर ज़िन्दा रखना चाहो तो कभी आँसू मत लाना।

 

मुद्दत के बाद उसने जो आवाज़ दी मुझे,
कदमों की क्या बिसात थी, साँसे ठहर गयीं।

 

मुँह की बात सुने हर कोई दिल के दर्द को जाने कौन;
आवाजों के बाज़ारों में ख़ामोशी पहचाने कौन;
सदियों सदियों वही तमाशा रस्ता रस्ता लम्बी खोज;
लेकिन जब हम मिल जाते हैं खो जाता है जाने कौन।

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ज़िक्र उस परी-वश का और फिर बयाँ अपना;
बन गया रक़ीब आख़िर था जो राज़-दाँ अपना।

 

छीनकर हाथों से जाम वो इस अंदाज़ से बोली,
कमी क्या है इन होठों में जो तुम शराब पीते हो।

 

हाल तो पूछ लू तेरा पर डरता हूँ आवाज़ से तेरी,
ज़ब ज़ब सुनी है कमबख्त मोहब्बत ही हुई है।

 

आँखों में देख कर वो दिल की हकीकत जानने लगे;
उनसे कोई रिश्ता भी नहीं फिर भी अपना मानने लगे;
बन कर हमदर्द कुछ ऐसे उन्होंने हाथ थामा मेरा;
कि हम खुदा से दर्द की दुआ मांगने लगे।

 

तोहमतेँ तो लगती रही रोज़ नयी नयी हम पर,
मगर जो सबसे हसीन इलज़ाम था वो तेरा नाम था।

 

हम उस से थोड़ी दूरी पर हमेशा रुक से जाते हैं;
न जाने उस से मिलने का इरादा कैसा लगता है;
मैं धीरे धीरे उन का दुश्मन-ए-जाँ बनता जाता हूँ;
वो आँखें कितनी क़ातिल हैं वो चेहरा कैसा लगता है।

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कभी दोस्ती कहेंगे कभी बेरुख़ी कहेंगे;
जो मिलेगा कोई तुझसा उसे ज़िन्दगी कहेंगे;
तेरा देखना है जादू तेरी गुफ़्तगू है खुशबू;
जो तेरी तरह चमके उसे रोशनी कहेंगे।

 

इश्क़ पर ज़ोर नहीं है ये वो आतश ग़ालिब,
कि लगाए न लगे और बुझाए न बने।

 

उसे मैं ढाँप लेना चाहता हूँ अपनी पलकों में;
इलाही उस के आने तक मेरी आँखों में दम रखना।

 

दिल को तेरी चाहत पे भरोसा भी बहुत है,
और तुझ से बिछड़ जाने का डर भी नहीं जाता।

 

अज़ीज़ इतना ही रखो कि जी संभल जाये,
अब इस कदर भी ना चाहो कि दम निकल जाये।

 

उल्टी हो गईं सब तदबीरें कुछ न दवा ने काम किया,
देखा इस बीमारी-ए-दिल ने आख़िर काम तमाम किया।

 

ये तो नहीं कि तुम सा जहान में हसीन नहीं,
इस दिल का क्या करूँ ये बहलता कहीं नहीं।

 

चलो उसका नही तो खुदा का एहसान लेते हैं;
वो मिन्नत से ना माना तो मन्नत से मांग लेते हैं।

 

ग़म्ज़ा नहीं होता कि इशारा नहीं होता;
आँख उन से जो मिलती है तो क्या क्या नहीं होता।

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तुम को चाहने की वजह कुछ भी नहीं,
बस इश्क़ की फितरत है बेवजह होना।

 

इश्क़ करने में नही पूछी जाती जात मोहबत की;
चलो कुछ तो है दुनिया में जो मज़हबी नहीं हुआ।

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दिल में आप हो और कोई खास कैसे होगा;
यादों में आपके सिवा कोई पास कैसे होगा;
हिचकियॉं कहती हैं आप याद करते हो;
पर बोलोगे नहीं तो मुझे एहसास कैसे होगा।

 

चुपके चुपके पहले वो ज़िन्दगी में आते हैं;
मीठी मीठी बातों से दिल में उतर जाते हैं;
बच के रहना इन हुस्न वालों से यारो;
इन की आग में कई आशिक जल जाते हैं।

 

मोहब्बत का कोई रंग नहीं फिर भी वो रंगीन है,
प्यार का कोई चेहरा नहीं फिर भी वो हसीन है।

 

क्या अच्छा क्या बुरा क्या भला देखा;
जब भी देखा तुझे अपने रु ब रु देखा;
सोचा बहुत भूल कर ना सोचूंगा तुझे;
जिस रात आँख लगी फिर तुझे हर ख्वाब में देखा।

 

उस की बाहों में सोने का अभी तक शौंक है मुझको,
मोहब्बत में उजड़ कर भी मेरी आदत नहीं बदली।

 

ऐ काश कुदरत का कहीं ये नियम हुआ करे,
तुझे देखने के सिवा ना मुझे कोई काम हुआ करे।

 

मैं तोड़ लेता अगर तू गुलाब होती;
मैं जवाब बनता अगर तू सवाल होती;
सब जानते है मैं शरब नहीं पीता;
मगर मैं भी पी लेता अगर तू शराब होती।

 

प्यार वो है जिसमे सच्चाई हो;
साथी की हर बात का एहसास हो;
उसकी हर अदा पर नाज़ हो;
दूर रह कर भी पास होने का एहसास हो।

 

गुफ्तगू उनसे होती यह किस्मत कहाँ,
ये भी उनका करम है कि वो नज़र तो आये।

 

ज़रा साहिल पे आकर वो थोड़ा मुस्कुरा देती;
भंवर घबरा के खुद मुझ को किनारे पर लगा देता;
वो ना आती मगर इतना तो कह देती मैं आँऊगी;
सितारे, चाँद सारा आसमान राह में बिछा देता।

 

अपनी ज़िन्दगी में मुझ को करीब समझना;
कोई ग़म आये तो उस ग़म में भी शरीक समझना;
दे देंगे मुस्कुराहट आँसुओं के बदले;
मगर हज़ारों में मुझे थोड़ा अज़ीज़ समझना।

 

ना जाने कब वो हसीन रात होगी;
जब उनकी निगाहें हमारी निगाहों के साथ होंगी;
बैठे हैं हम उस रात के इंतज़ार में;
जब उनके होंठों की सुर्खियां हमारे होंठों के साथ होंगी।

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मुझको चाहते होंगे और भी बहुत लोग,
मगर मुझे मोहब्बत सिर्फ अपनी मोहब्बत से है।

 

मेरी यादो मे तुम हो, या मुझ मे ही तुम हो,
मेरे खयालो मे तुम हो, या मेरा खयाल ही तुम हो,
दिल मेरा धडक के पूछे, बार बार एक ही बात,
मेरी जान मे तुम हो, या मेरी जान ही तुम हो।

 

कुछ मतलब के लिए ढूँढते हैं मुझको;
बिन मतलब जो आए तो क्या बात है;
कत्ल कर के तो सब ले जाएँगे दिल मेरा;
कोई बातों से ले जाए तो क्या बात है।

 

रात से शिकायत क्या बस तुम्हीं से कहना है;
बस तुम ज़रा ठहर जाओ रात कब ठहरती है।

 

तेरे बिना टूट कर बिखर जायेंगे;
तुम मिल गए तो गुलशन की तरह खिल जायेंगे;
तुम ना मिले तो जीते जी ही मर जायेंगे;
तुम्हें जो पा लिया तो मर कर भी जी जायेंगे।

 

ये याद है तुम्हारी या यादों में तुम हो,
ये ख्वाब हैं तुम्हारे या ख्वाबों में तुम हो,
हम नहीं जानते हमें बस इतना बता दो,
हम जान हैं तुम्हारी या हमारी जान तुम हो।

 

वो मुलाक़ात कुछ अधूरी सी लगी;
पास होकर भी कुछ दूरी सी लगी;
होंठों पे हँसी आँखों में नमी;
पहली बार किसी की चाहत ज़रूरी सी लगी।

 

आदत सी हो गयी है तेरे करीब रहने की,
बस इतना बता तेरी साँसों की खुशबू वाला इत्र मिलेगा कहाँ!

 

दो कदम चलने के लिए साथ माँगा है;
बस पल दो पल के लिए प्यार माँगा है;
हम समझते हैं उसकी मज़बूरियों को;
इसलिए उसे उसकी मज़बूरियों के साथ माँगा है।

 

किसी की क्या मज़ाल थी जो कोई हमें खरीद सकता;
हम तो खुद ही बिक गए खरीददार देख कर।

 

कौन सी बात है जो उस में नहीं,
उस को देखे मेरी नज़र से कोई।

 

हम उनके दिल पर राज़ करते थे,
मेरा दिल जिनका गुलाम आज भी है।

 

फ़िज़ा की महकती शाम हो तुम,
प्यार में छलकता जाम हो तुम,
सीने में छुपाये फिरता हूँ यादें तुम्हारी,
इसलिए मेरी ज़िन्दगी का दूसरा नाम हो तुम!

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रोज़ वो ख़्वाब में आते हैं गले मिलने को,
मैं जो सोता हूँ तो जाग उठती है क़िस्मत मेरी।

 

होगी कितनी चाहत उस दिल में,
जो खुद ही मान जाये कुछ पल खफा होने के बाद।

 

आँखों में बस बसी है सूरत आपकी;
दिल में छुपी है मूरत आपकी;
महसूस होता है जीने के लिए;
हमें तो बस है ज़रूरत आपकी।

 

हम ने सीने से लगाया दिल न अपना बन सका;
मुस्कुरा कर तुम ने देखा दिल तुम्हारा हो गया।

 

सौ बार कहा दिल से चल भूल भी जा उसको,
सौ बार कहा दिल ने तुम दिल से नहीं कहते।

 

मैं जो चाहूँ तो अभी तोड़ लूँ नाता तुम से;
पर मैं बुझ-दिल हूँ मुझे मौत से डर लगता है।

 

देख मेरी आँखों में ख्वाब किसके हैं;
दिल में मेरे सुलगते तूफ़ान किसके हैं;
नहीं गुज़रा कोई आज तक इस रास्ते से हो कर;
फिर ये क़दमों के निशान किसके हैं।

 

देख लेते हो मोहब्बत से यही काफी है,
दिल धड़कता है सहूलत से यही काफी है,
हाल दुनिया के सताए हुए कुछ लोगों का,
पूछ लेते हो शरारत से यही काफी है।

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जब से मुँह को लग गई अख़्तर मोहब्बत की शराब,
बे-पिए आठों पहर मदहोश रहना आ गया।

 

सुना है प्यार में मुश्किल नहीं कुछ भी;
चलो समंदर में आग लगा कर आज़माते हैं।

 

क्या कहें कुछ भी कहा नहीं जाता;
दर्द मिलता है पर सहा नहीं जाता;
हो गयी है मोहब्बत आपसे इस कदर;
कि अब तो बिन देखे आप को जिया नहीं जाता।

 

मेरे दिल ने जब भी कभी कोई दुआ माँगी है;
हर दुआ में बस तेरी ही वफ़ा माँगी है;
जिस प्यार को देख कर जलते हैं यह दुनिया वाले;
तेरी मोहब्बत करने की बस वो एक अदा माँगी है।

 

अभी कम-सिन हो रहने दो कहीं खो दोगे दिल मेरा;
तुम्हारे ही लिए रखा है ले लेना जवाँ हो कर।


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इश्क़ में कोई खोज नहीं होती;
यह हर किसी से हर रोज नहीं होती;
अपनी जिंदगी में हमारी मौजूदगी को बेवजह मत समझना;
क्योंकि पलकें कभी आँखों पर बोझ नहीं होती।

 

बैठे हैं दिल में ये अरमां जगाये,
कि वो आज नजरों से हमें अपनी पिलायें;
मजा तो तब ही पीने का यारो,
इधर हम पियें और नशा उनको हो जाये।

 

सब पूछते हैं मुझ से क्यों रातों को मैं जागता हूँ और दिन में खोया हुआ सा रहता हूँ, चुप रहूँ या कह दूँ अब सब से कि इस बेचैन दिल की वजह तुम हो।

 

ज़रूरी काम है लेकिन रोज़ाना भूल जाता हूँ,
मुझे तुम से मोहब्बत है बताना भूल जाता हूँ,
तेरी गलियों में फिरना इतना अच्छा लगता है,
मैं रास्ता याद रखता हूँ ठिकाना भूल जाता हूँ।

 

इत्तेफ़ाक़ से ही सही मगर मुलाकात हो गयी;
ढूंढ रहे थे हम जिन्हें आखिर उन से बात हो गयी;
देखते ही उन को जाने कहाँ खो गए हम;
बस यूँ समझो दोस्तो वहीं से हमारे प्यार की शुरुआत हो गयी।

 

बेपनाह मोहब्बत का एक ही उसूल है,
मिले या ना मिले तू हर हाल मे कबूल है।

 

क्या मज़ा देती है बिजली की चमक मुझ को रियाज़;
मुझ से लिपटे हैं मिरे नाम से डरने वाले।

 

जिस को जाना ही नहीं उस को ख़ुदा कैसे कहें;
और जिसे जान लिया हो वो ख़ुदा कैसे हो।

 

सूरज ढलते ही रख दिये उसने मेरे होठों पर होंठ,
इश्क का रोज़ा था और गज़ब की इफ्तारी।

 

इश्क़ है इश्क़ ये मज़ाक़ नहीं;
चंद लम्हों में फ़ैसला न करो।

 

अब आ गए हैं आप तो आता नहीं है याद;
वर्ना कुछ हम को आप से कहना ज़रूर था।

 

ऐ आशिक तू सोच तेरा क्या होगा;
क्योंकि हशर की परवाह मैं नहीं करता;
फनाह होना तो रिवायत है तेरी;
इश्क़ नाम है मेरा मैं नहीं मरता।

 

आँखों की गहराई को समझ नहीं सकते;
होंठों से हम कुछ कह नहीं सकते;
कैसे बयाँ करें हम यह हाल-ए-दिल आपको;
कि तुम्हीं हो जिसके बगैर हम रह नहीं सकते।

 

सजा है मौसम तुम्हारी महक से आज फिर;
लगता है हवायें तुम्हें छू कर आयी हैं।

 

दिल अपने को एक मंदिर बना रखा है,
उस के अंदर बस तुझ को बसा रखा है,
रखता हूँ तेरी चाहत की तमन्ना रात दिन,
तेरे आने की उम्मीद का दिया जला रखा है।

 

जब कोई ख्याल दिल से टकराता है;
दिल ना चाह कर भी खामोश रह जाता है;
कोई सब कुछ कह कर प्यार जताता है;
तो कोई कुछ ना कह कर प्यार निभाता है।

 

नींद से क्या शिकवा जो आती नहीं रात भर,
कसूर तो उस चेहरे का है जो सोने नही देता।

 

अगर तुम्हें यकीन नहीं तो कहने को कुछ नहीं मेरे पास,
अगर तुम्हें यकीन हैं तो मुझे कुछ कहने की ज़रूरत नहीं।

 

दिल से हर मामला कर के चले थे साफ़ हम,
कहने में उनके सामने बात बदल गयी।

 

याद रखना ही मोहब्बत में नहीं है सब कुछ,
भूल जाना भी बड़ी बात हुआ करती है।

 

इंतज़ार मेरी उम्र से लंबा हो शायद,
तेरा आना इस मर्ज़ की दवा हो शायद।

 

नहीं भाता अब तेरे सिवा किसी और का चेहरा,
तुझे देखना और देखते रहना दस्तूर बन गया है।

 

वादा करके और भी आफ़त में डाला आपने;
ज़िन्दगी मुश्किल थी, अब मरना भी मुश्किल हो गया।

 

यह मेरा इश्क़ था या फिर दीवानगी की इन्तहा,
कि तेरे ही करीब से गुज़र गए तेरे ही ख्याल से।

 

मुझ से रूठकर वो खुश है तो शिकायत ही कैसी,
अब मैं उनको खुश भी ना देखूं तो हमारी मोहब्बत ही कैसी।

 

मुझे याद करने से ये मुद्दा था;
निकल जाए दम हिचकियाँ आते आते।

 

तेरा अंदाज़-ए-सँवरना भी क्या कमाल है;
तुझे देखूं तो दिल धड़के, ना देखूं तो बेचैन रहूँ।

 

हाल तो पूछ लू तेरा पर डरता हूँ आवाज़ से तेरी;
ज़ब ज़ब सुनी है कमबख्त मोहब्बत ही हुई है।

 

तू कहीं हो दिल-ए-दीवाना वहाँ पहुँचेगा;
शमा होगी जहाँ परवाना वहाँ पहुँचेगा।

 

आये जो वो सामने तो अज़ब तमाशा हुआ;
हर शिकायत ने जैसे ख़ुदकुशी कर ली।

 

दिल की हसरत मेरी ज़ुबान पे आने लगी;
तुमने देखा और ये ज़िन्दगी मुस्कुराने लगी;
ये इश्क़ के इन्तहा थी या दीवानगी मेरी;
हर सूरत में मुझे सूरत तेरी नज़र आने लगी।

 

तेरा अक्स गढ़ गया है आँखों में कुछ ऐसा,
सामने खुदा भी हो तो दिखता है हू-ब-हू तुझ जैसा।

 

तेरे हर ग़म को अपनी रूह में उतार लूँ;
ज़िन्दगी अपनी तेरी चाहत में संवार लूँ;
मुलाक़ात हो तुझसे कुछ इस तरह मेरी;
सारी उम्र बस एक मुलाक़ात में गुज़ार लूँ।

 

वो चांदनी का बदन ख़ुशबुओं का साया है;
बहुत अज़ीज़ हमें है मगर पराया है;
उतर भी आओ कभी आसमाँ के ज़ीने से;
तुम्हें ख़ुदा ने हमारे लिये बनाया है।

 

कहीं वो आ के मिटा दें न इंतज़ार का लुत्फ़,
कहीं क़ुबूल न हो जाए इल्तिजा मेरी।

 

मोहब्बत मुझे थे उसी से सनम,
यादों में उसकी यह दिल तड़पता रहा,
मौत भी मेरी चाहत को न रोक सकी,
क़ब्र में भी यह दिल उसके लिए धड़कता रहा।

 

ज़िंदा रहे तो हर दिन तुम्हें याद करते रहेंगे;
भूल गए तो समझ लेना खुदा ने हमें याद कर लिया।

 

अब तक ख़बर न थी कि मोहब्बत गुनाह है;
अब जान कर गुनाह किए जा रहा हूँ मैं।

 

साथ अगर दोगे तो मुस्कुराएंगे ज़रूर;
प्यार अगर दिल से करोगे तो निभाएंगे ज़रूर;
कितने भी काँटे क्यों ना हों राहों में;
आवाज़ अगर दिल से दोगे तो आएंगे ज़रूर।

 

वो कभी मिल जाएं तो क्या कीजिये;
रात दिन सूरत को देखा कीजिये;
चाँदनी रातों में एक एक फूल को;
बेखुदी कहती है सज़दा कीजिये।

 

कोई समझे तो एक बात कहूँ,
इश्क़ तौफ़ीक़ है गुनाह नहीं।

 

अदा है, ख्वाब है, तकसीम है, तमाशा है;
मेरी इन आँखों में एक शख्स बेतहाशा है।

 

मत देखो हमें तुम यूँ इस कदर,
इश्क़ तुम कर बैठोगे और इलज़ाम हम पे लग जायेगा।

 

आहिस्ता आहिस्ता आपका यकीन करने लगे हैं;
आहिस्ता आहिस्ता आपके करीब आने लगे हैं;
दिल तो देने से घबराते हैं मगर;
आहिस्ता आहिस्ता आपके दिल की कदर करने लगे हैं।

 

कर दे इश्क़ में अपने मदहोश तरह कि,
होश भी आने से पहले इज़ाज़त माँगे।

 

तुझे कोई और भी चाहे इस बात से दिल थोड़ा जलता है,
पर फखर है मुझे इस बात पर कि हर कोई मेरी पसंद पे ही मरता है।

 

वो खुद पर गरूर करते है, तो इसमें हैरत की कोई बात नहीं;
जिन्हें हम चाहते है, वो आम हो ही नहीं सकते।

 

ख्याल में आता है जब भी उसका चेहरा;
तो लबों पे अक्सर फरियाद आती है;
भूल जाता हूँ सारे ग़म और सितम उसके;
जब ही उसकी थोड़ी सी मोहब्बत याद आती है।

 

कुछ इस अदा से आज वो पहलू-नशीं रहे,
जब तक हमारे पास रहे हम नहीं रहे।

 

दूर रह कर भी जो समाया है मेरी रूह में;
पास वालों पर वो शख्स कितना असर रखता होगा।

 

क्यों तू अच्छा लगता है, वक़्त मिला तो सोचेंगे;
तुझ में क्या क्या देखा है, वक़्त मिला तो सोचेंगे;
सारा शहर शहंशाही का दावेदार तो है लेकिन;
क्यों तू हमारा अपना है, वक़्त मिला तो सोचेंगे।

 

दो बातें उनसे की तो दिल का दर्द खो गया;
लोगों ने हमसे पूछा कि तुम्हें क्या हो गया;
बेकरार आँखों से सिर्फ हँस के रह गए;
ये भी ना कह सके कि हमें प्यार हो गया।

 

ये न जाने थे कि उस महफ़िल में दिल रह जाएगा,
हम ये समझे थे चले आएँगे दम भर देख कर।

 

ये दिल भुलाता नहीं है मोहब्बतें उसकी;
पड़ी हुई थी मुझे कितनी आदतें उसकी;
ये मेरा सारा सफर उसकी खुशबू में कटा;
मुझे तो राह दिखाती थी चाहतें उसकी।

 

धडकनों को कुछ तो काबू में कर ए दिल,
अभी तो पलकें झुकाई हैं मुस्कुराना अभी बाकी है उनका।

 

मैंने अपने आप को हमेशा बादशाह समझा,
एहसास तब हुआ जब तुझे माँगा फकीरों की तरह।

 

मेरी चाहत को अपनी मोहब्बत बना के देख;
मेरी हँसी को अपने होंठो पे सज़ा के देख;
ये मोहब्बत तो हसीन तोहफा है एक;
कभी मोहब्बत को मोहब्बत की तरह निभा कर तो देख।

 

इत्तेफ़ाक़ से ही सही मगर मुलाकात हो गयी;
ढूंढ रहे थे हम जिन्हें आखिर उन से बात हो गयी;
देखते ही उन को जाने कहाँ खो गए हम;
बस यूँ समझो दोस्तो वहीं से हमारे प्यार की शुरुआत हो गयी।

 

अपनी ज़िन्दगी का अलग उसूल है;
प्यार की खातिर तो काँटे भी कबूल हैं;
हँस के चल दूँ काँच के टुकड़ों पर;
अगर तू कह दे ये मेरे बिछाये हुए फूल हैं।

 

उसे कह दो अपनी ख़ास हिफाज़त किया करे,
बेशक साँसें उसकी हैं मगर जान तो वो हमारी है।

 

मेरी यादों में तुम हो, या मुझ में ही तुम हो;
मेरे खयालों में तुम हो, या मेरा ख़याल ही तुम हो।

 

प्यार की तरह आधा अधूरा सा अल्फाज था मैं;
तुमसे क्या जुडा ज़िंदगी की तरह पूरी गजल बन गया।

 

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