TOP 50 SHAYARI FOR LOVER

SHAYARI FOR LOVE
SHAYARI FOR LOVE

Shayari for love,
Shayari for lovers,
Shayari for love Hindi,
Shayari for love in Hindi,
Shayari for love with images,

 

किसी पे राज़-ए-मुहब्बत न आशकार किया
तेरी नज़र के बदलने का इंतज़ार किया

न कोई वादा था उनसे न कोई पाबन्दी
तमाम उम्र मगर उनका इंतज़ार किया

ठहर के मुझपे ही अह्ल-ए-चमन की नज़रों ने
मेरे जुनून से अंदाज़ा-ए-बहार किया

सहर के डूबते तारो, गवाह रहना तुम
कि मैंने आख़िरी साँसों तक इंतज़ार किया

जहाँ से तेरी तवज्जोह हुई फसाने पर
वहीं से डूबती नज़रों नसे इख्तिसार किया

यही नहीं कि हमीं इंतज़ार करते रहे
कभी-कभी तो उन्होंने भी इंतज़ार किया

SHAYARI FOR LOVE
SHAYARI FOR LOVE

SHAYARI FOR LOVER

न देखो पीर उर की, पर अधर की प्यास तो देखो
निहारो मत दिये को, पर शलभ की लाश तो देखो

न कहना फिर तड़प का कुछ असर होता नहीं जग में,
धरा के ताप पर रोता हुआ आकाश तो देखो

सही है, रिक्त हूँ मैं ज़िन्दगी की मुस्कराहट से,
व्यथाओं ने दिया है जो मधुर उल्लास तो देखो

इधर उपवन हुआ वीरान है, यह मानता हूँ मैं
उधर अंगड़ाइयाँ लेता हुआ मधुमास तो देखो

नहीं मालूम तुमको ख़ुद तुम्हारे ईश की सूरत
मनुज की भावना का यह सबल उपहास तो देखो

रुपहली रात में माना व्यथित आँखें बरसती हैं
घनी काली घटाओं में तड़ित का हास तो देखो

न मापो ज़िन्दगी में दर्द की गहराइयों को तुम
हृदय के अंक में पलता हुआ विश्वास तो देखो

 

 

 

ज़िन्दगी-सी यों ज़िन्दगी भी नहीं
किन्तु मंजूर ख़ुदक़ुशी भी नहीं

सिलसिलेवार मौत जीते हैं
ज़िन्दगी की घड़ी टली भी नहीं

दिल की दुनिया उजाड़ दी ख़ुद ही
गो कि फ़ितरत में दिल्लगी भी नहीं

बेख़ुदी का मलाल कौन करे
काम आई यहाँ ख़ुदी भी नहीं

कट गई उम्र, उठ गई महफ़िल
बात ईमान की चली भी नहीं

प्रश्न उठता है मैं नहीं हूँ कहाँ
और उत्तर में मैं कहीं भी नहीं

 

SHAYARI FOR LOVER

 

आप कहने को बहुत ज़्यादा बड़े हैं
असलियत यह है मचानों पर खड़े हैं

ख़ास कंधा, दास चंदा, रास धंधा,
एक अंधे दौर के सिर पर चढ़े हैं

कीजिए झट कीजिए इनकी नुमाइश,
आपके आदर्श फ्रेमों में जड़े हैं

कोई सच्चाई यहाँ टिकती नहीं है
क्रांति के वक्तव्य क्या चिकने घड़े हैं?

हर किसी में दम नहीं इनको निभाये,
आदमीयत के नियम ख़ासे कड़े हैं

वो लड़ेंगे क्या कि जो ख़ुद पर फ़िदा हैं,
हम लड़ेंगे, हम ख़ुदाओं से लड़े हैं

 

 

 

न मेरा है न तेरा है ये हिन्दुस्तान सबका है
नहीं समझी गई ये बात तो नुक़सान सबका है

हज़ारों रास्ते खोजे गए उस तक पहुँचने के
मगर पहुँचे हुए ये कह गए भगवान सबका है

जो इसमें मिल गईं नदियाँ वे दिखलाई नहीं देतीं
महासागर बनाने में मगर अहसान सबका है

अनेकों रंग, ख़ुश्बू, नस्ल के फल-फूल पौधे हैं
मगर उपवन की इज़्ज़त-आबरू-ईमान सबका है

हक़ीक़त आदमी की और झटका एक धरती का
जो लावारिस पड़ी है धूल में सामान सबका है

ज़रा से प्यार को ख़ुशियों की हर झोली तरसती है
मुक़द्दर अपना-अपना है, मगर अरमान सबका है

 

SHAYARI FOR LOVER

 

दोस्ती की आज क़समें खा रहा संसार है
मुफ़लिसी में साथ दे जो वो ही अपना यार है

दुश्मनी फिर भी भली, ना दोस्ती नादान की
जान पायेगा नहीं वो कब बना हथियार है

तंगदिल से दोस्ती यारो कभी होती नहीं
दोस्ती में दिल खुला हो प्रीति की दरकार है

रूप अपना किसने देखा किसने जाना दोस्तो
दोस्ती कर आईने से आइना तैयार है

हम समझते थे वहाँ हैं यार यारों के हमीं
अब यहाँ पर जान पाए वाक़ई क्या प्यार है

 

Shayari for love,
Shayari for lovers,
Shayari for love Hindi,
Shayari for love in Hindi,
Shayari for love with images,

 

 

 

मंदिरों में आप मनचाहे भजन गाया करें
मैक़दा ये है यहाँ तहज़ीब से आया करें

रात की ये रौनक़ें अपने मुक़द्दर में नहीं
शाम होते ही हम अपने घर चले जाया करें

साथ जब देता नहीं साया अंधेरे में कभी
रौशनी में ऐसी शय से क्यों न घबराया करें

बन्द रहते हों जो अक्सर आम लोगों के लिये
अपने घर में ऐसे दरवाज़े न लगवाया करें

ये हिदायत एक दिन आयेगी हर स्कूल में
मुल्क़ की तस्वीर बच्चों को न दिखलाया करें

क्यों नहीं आता है इन तूफ़ानी लहरों को शऊर
कम से कम काग़ज़ की नावों से न टकराया करें

 

SHAYARI FOR LOVER

 

ढल गया दे के रोशनी सूरज
कह गया बात इक नई सूरज

एक्टिंग डूबने की करता है
डूबता तो नहीं कभी सूरज

शाम होते ही छोड़ जाता है
रोज़ ऑंखों में कुछ नमी सूरज

रात गुज़री तो चांद कहने लगा
फिर चुरा लेगा चांदनी सूरज

बात सब आसमां की करते हैं
मेरी नज़रों में हैं कई सूरज

रात ढलने का इंतज़ार तो कर
सुब्ह लाएगी फिर वही सूरज

 

 

 

हमारे चेहरे पे ग़म भी नहीं, ख़ुशी भी नहीं
अंधेरा पूरा नहीं, पूरी रौशनी भी नहीं

है दुश्मनों से कोई ख़ास दुश्मनी भी नहीं
जो दोस्त अपने हैं उनसे कभी बनी भी नहीं

मैं कैसे तोड़ दूँ दुनिया से सारे रिश्तों को
अभी तो पूरी तरह उससे लौ लगी भी नहीं

अजीब रुख़ से वो बातों को मोड़ देता है
कि जैसे बात ग़लत भी नहीं, सही भी नहीं

तुम्हारे पास हक़ीक़त में इक समुन्दर है
हमारे ख़्वाब में छोटी-सी इक नदी भी नहीं

कोई बताये ख़ुशी किसके साथ रहती है
हमें तो एक ज़माने से वो दिखी भी नहीं

लो फिर से आ गये बस्ती को फूँकने के लिये
अभी तो पहले लगाई हुई बुझी भी नहीं

अजीब बात है दीपावली के अवसर पर
करोड़ों बच्चों के हाथों में फुलझड़ी भी नहीं

 

 

जो फैलाने चले हैं मुल्क़ में दहशत धमाकों से
वही छुपते फिरा करते हैं इक मुद्दत धमाकों से

न ख़बरों में उछाल आया, न बाज़ारों में सूनापन
न बिगड़ी मुल्क़ के माहौल की सेहत धमाकों से

वही हल्ला, वही चीखें, वही ग़ुस्सा, वही नफ़रत
हमें अब हो गई इस शोर की आदत, धमाकों से

ये दहशतग़र्द अब इस बात से आगाह हो जाएँ
कि अब आवाम की बढ़ने लगी हिम्मत धमाकों से

वज़ूद अपना जताने के लिए वहशी बने हैं जो
उन्हें हासिल नहीं होती कभी शोहरत धमाकों से

 

 

तुम सोच रहे हो बस, बादल की उड़ानों तक
मेरी तो निगाहें हैं, सूरज के ठिकानों तक

टूटे हुए ख़्वाबों की इक लम्बी कहानी है
शीशे की हवेली से, पत्थर के मकानों तक

दिल आम नहीं करता, अहसास की ख़ुशबू को
बेकार ही लाए हम चाहत को ज़ुबानों तक

लोबान का सौंधापन, चंदन की महक में है
मंदिर का तरन्नुम है, मस्जिद की अज़ानों तक

इक ऐसी अदालत है, जो रूह परखती है
महदूद नहीं रहती वो सिर्फ़ बयानों तक

हर वक़्त फ़िजाओं में, महसूस करोगे तुम
मैं प्यार की ख़ुशबू हूँ, महकूंगा ज़मानों तक

 

 

 

पूछिये मत क्यों नहीं आराम आया रात भर
उनके आने का ख़याले-ख़ाम आया रात भर

और लोगों की कहानी सुनके मैं करता भी क्या
मेरा अफ़साना ही मेरे काम आया रात भर

याद करने को ज़माने भर के ग़म भी कम न थे
भूलने को बस तुम्हारा नाम आया रात भर

मयक़दे से तिश्नालब लौटे थे शायद इसलिये
ख़्वाब में रह-रह के खाली जाम आया रात भर

देखना है अब कहाँ रह पायेगी तौबा मेरी
मेरे ख़्वाबों में उमर ख़य्याम आया रात भर

वक़्त क़म है काम काफ़ी दोस्तो कुछ तो करो
उम्र के ख़ेमे से ये पैग़ाम आया रात भर

 

Shayari for love,
Shayari for lovers,
Shayari for love Hindi,
Shayari for love in Hindi,
Shayari for love with images,

 

अपनी रुसवाई तेरे नाम का चर्चा देखूँ
इक ज़रा शेर कहूँ और मैं क्या-क्या देखूँ

नींद आ जाए तो क्या महफ़िलें बरपा देखूँ
आँख खुल जाए तो तनहाई का सहरा देखूँ

शाम भी हो गई धुंधला गईं आँखें भी मेरी
भूलनेवाले मैं कब तक तेरा रस्ता देखूँ

सब ज़िदें उसकी मैं पूरी करूँ, हर बात सुनूँ
एक बच्चे की तरह से उसे हँसता देखूँ

मुझ पे छा जाए वो बरसात की ख़ुश्बू की तरह
अंग-अंग अपना उसी रुत में महकता देखूँ

तू मेरी तरह से यक़ता है मगर मेरे हबीब
जी में आता है कोई और भी तुझ-सा देखूँ

मैंने जिस लमहे को पूजा है उसे बस इक बार
ख़्वाब बन कर तेरी आँखों में उतरता देखूँ

तू मेरा कुछ नहीं लगता है मगर जान-ए-हयात
जाने क्यों तेरे लिए दिल को धड़कता देखूँ

 

 

क्या ये मुमक़िन नहीं बहार आये
और आये तो बार-बार आये

आप पर ऐतबार कर तो लूँ
पहले ख़ुद पर तो ऐतबार आये

जिसने मुझको दिये थे ग़म ही ग़म
अपनी ख़ुशियाँ उसी पे वार आये

चार दिन की ये ज़िन्दगी का लिबास
कुछ ने पहना है, कुछ उतार आये

बेवफ़ा होंगे वो किसी के लिये
मुझसे मिलने तो बार-बार आये

ख़्वाब को ख़्वाब की तरह देखो
फूल आये या उसमें ख़ार आये

 

 

दुनिया की लिये ख़ैर-ख़बर डूब रहा है
तय कर लिया सूरज ने सफ़र डूब रहा है

हम मंदिरो-मस्जिद को बचाने में लगे हैं
घर की है नहीं फ़िक्र कि घर डूब रहा है

मँझधार में नेता जो दिखा, लोग ये बोले
अच्छा है अजी डूबे, अगर डूब रहा है

उस डूबने वाले के मुक़द्दर को कहें क्या
तिनके का सहारा है मगर डूब रहा है

तस्वीर बनाते हो जो कपड़ों के बिना ही
उन काँपते हाथों से हुनर डूब रहा है

 

 

गुमसम तनहा बैठा होगा
सिगरट के कश भरता होगा

उसने खिड़की खोली होगी
और गली में देखा होगा

ज़ोर से मेरा दिल धड़का है
उस ने मुझ को सोचा होगा

सच बतलाना कैसा है वो
तुम ने उस को देखा होगा

मैं तो हँसना भूल गया हूँ
वो भी शायद रोता होगा

अपने घर की छत पे बैठा
शायद तारे गिनता होगा

ठंडी रात में आग जला कर
मेरा रास्ता तकता होगा

 

 

डूबते वक्त क़िसी का तो सहारा होता
कोई तिनका, कोई कश्ती या किनारा होता

क्यों पसोपेश में रहते कि किधर जायें हम
तेरी जानिब से अगर कोई इशारा होता

घर से निकला न कोई आपने अब देख लिया
मैं तो आ जाता अगर मुझको पुकारा होता

डूब कर मैंने भँवर को भी डुबोया वरना
हादसा कोई वहाँ आज दुबारा होता

मांगते अपने लिये उम्रदराज़ी की दुआ
एक लम्हा भी अगर हँस के गुज़ारा होता

 

 

Shayari for love,
Shayari for lovers,
Shayari for love Hindi,
Shayari for love in Hindi,
Shayari for love with images,

 

ज़िन्दगी के फलसफ़े में अब न उलझाना मुझे
ख़ुद समझ लेना तो उसके बाद समझाना मुझे

मेरी दिन भर की उदासी को समझ लेता है वो
शाम होते ही बुला लेता है मयख़ाना मुझे

आईना भी अब मुझे कुछ अजनबी लगने लगा
अपने ही चेहरे से कहता हूँ कि पहचाना मुझे

आज फिर कुछ बस्तियाँ जलती नज़र आईं मुझे
आज फिर लिखना पड़ेगा एक अफ़साना मुझे

बदहवासी देखिये साक़ी ने यूँ बाँटी शराब
मेरा पैमाना उसे और उसका पैमाना मुझे

इन दिनों तो मुझको तिनके का सहारा भी नहीं
दोस्तो सैलाब की ज़द में न ले जाना मुझे

आज उसकी याद फिर चुपके से दिल में आ गई
आज कुछ आबाद-सा लगता है वीराना मुझे

 

 

 

मेरे घर की मुफ़लिसी ने काम ये अच्छा किया
हादसों के इस शहर में नींद का सहरा दिया

उम्र भर जिस घर के जल जाने का मुझको डर रहा
तुमने उस ही काग़ज़ी घर में मुझे ठहरा दिया

जिसकी नज़रों में चमक और है लबों पर सुर्ख़ियाँ
उसके दिल पर ज़िन्दगी ने घाव इक गहरा दिया

फूल की ख़ुश्बू उसे कब ज़िन्दगी दे पायेगी
जिसपे शाहे-वक़्त ने है मौत का पहरा दिया

मुफ़लिसी में भी ख़ुदा ने ज़ुल्म उस पे ये किया
ख़ूबसूरत जिस्म देकर, दाग़ इक गहरा दिया

 

 

Shayari for love,
Shayari for lovers,
Shayari for love Hindi,
Shayari for love in Hindi,
Shayari for love with images,

 

 

हँसने का हँसाने का हुनर ढूंढ रहे हैं
हम लोग दुआओं में असर ढूंढ रहे हैं

अब कोई हमें ठीक-ठिकाने तो लगाए
घर में हैं मगर अपना ही घर ढूंढ रहे हैं

जब पाँव सलामत थे तो रस्ते में पड़े थे
अब पाँव नहीं हैं तो सफ़र ढूंढ रहे हैं

क्या जाने किसी रात के सीने में छिपी है
सूरज की तरह हम भी सहर ढूंढ रहे हैं

हालात बिगड़ने की नई मंज़िलें देखो
सुकरात के हिस्से का ज़हर ढूंढ रहे हैं

कुछ लोग अभी तक भी अंधेरे में खड़े हैं
कुछ चाय के प्यालों में गदर ढूंढ रहे हैं

 

SHAYARI FOR LOVE
SHAYARI FOR LOVE

 

घटा से घिर गई बदली नज़र नहीं आती
बहा ले नीर तू उजली नज़र नहीं आती

हवा में शोर ये कैसा सुनाई देता है
कहीं पे गिर गई बिजली नज़र नहीं आती

हैं चारों ओर नुमाइश के दौर जो यारो
दुआ भी अब यहाँ असली नज़र नहीं आती

चमन में ख़ार ने पहने गुलों के चेहरे हैं
कली कोई कहाँ कुचली नज़र नहीं आती

पहाड़ों से गिरा झरना तो यूँ ज़मीं बोली
ये दिल की पीर थी पिघली नज़र नहीं आती

 

 

लब-ए-ख़मोश से अफ़्शा होगा
राज़ हर रंग में रुसवा होगा

दिल के सहरा में चली सर्द हवा
अब्र गुलज़ार पे बरसा होगा

तुम नहीं थे तो सर-ए-बाम-ए-ख़याल
याद का कोई सितारा होगा

किस तवक्क़ो पे किसी को देखें
कोई तुम से भी हसीं क्या होगा

ज़ीनत-ए-हल्क़ा-ए-आग़ोश बनो
दूर बैठोगे तो चर्चा होगा

ज़ुल्मत-ए-शब में भी शर्माते हो
दर्द चमकेगा तो फिर क्या होगा

जिस भी फ़नकार का शाहकार हो तुम
उस ने सदियों तुम्हें सोचा होगा

किस क़दर कब्र से चटकी है कली
शाख़ से गुल कोई टूटा होगा

उम्र भर रोए फ़क़त इस धुन में
रात भीगी तो उजाला होगा

सारी दुनिया हमें पहचानती है
कोई हम सा भी न तनहा होगा

 

 

 

चंद सस्ती ख्वाहिशों पर सब लुटाकर मर गईं
नेकियाँ ख़ुदगर्ज़ियों के पास आकर मर गईं

जिनके दम पर ज़िन्दगी जीते रहे हम उम्र भर
अंत में वो ख्वाहिशें भी डबडबाकर मर गईं

बदनसीबी, साज़िशें, दुश्वारियाँ, मातो-शिक़स्त
जीत की चाहत के आगे कसमसाकर मर गईं

मीरो-ग़ालिब रो रहे थे रात उनकी लाश पर
चंद ग़ज़लें चुटकुलों के बीच आकर मर गईं

वो लम्हा जब झूठ की महफ़िल में सच दाखिल हुआ
साज़िशें उस एक पल में हड़बड़ा कर मर गईं

क्या इसी पल के लिए करता था गुलशन इंतज़ार
जब बहार आई तो कलियाँ खिलखिला कर मर गईं

जिन दीयों में तेल कम था, उन दीयों की रोशनी
तेज़ चमकी और पल में डगमगा कर मर गईं

दिल कहे है- प्रेम में उतरी तो मीरा जी उठीं
अक्ल बोले- बावरी थीं, दिल लगाकर मर गईं

Shayari for love,
Shayari for lovers,
Shayari for love Hindi,
Shayari for love in Hindi,
Shayari for love with images,

 

 

 

2 Trackbacks / Pingbacks

  1. new year Shayari,new yearShayari 2020,new year Shayari Hindi
  2. bewafa shayari hindi, bewafa shayari in hindi,bewafa shayari

Leave a Reply

Your email address will not be published.


*